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Saturday, June 15, 2024
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लातेहार में विश्व आदिवासी दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में अतिथियों ने कहा- जल, जंगल और जमीन से है आदिवासियों की पहचान

लातेहार : विश्व आदिवासी दिवस पर आदिवासी समन्वय समिति की ओर से बुधवार को वोसाओड़ा में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में उपायुक्त हिमांशु मोहन, विशिष्ट अतिथि के रूप में लातेहार विधायक बैद्यनाथ राम, मनिका विधायक रामचन्द्र सिंह, जिला परिषद अध्यक्ष पूनम देवी, अपर समाहर्ता आलोक शिकारी कच्छप, युवा कांग्रेस की प्रदेश उपाध्यक्ष निशा भगत, एसडीओ शेखर कुमार शामिल हुए।

प्रकृति के साथ चलने वाले लोग हैं आदिवासी

कार्यक्रम की शुरुआत कांग्रेस जिलाध्यक्ष मुनेश्वर उरांव के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने कहा कि आदिवासी प्रकृति के साथ चलने वाले लोग हैं। जैसे-जैसे प्रकृति चलती है, आदिवासी लोग उसका अनुसरण करते हैं। पहले बैगा-पाहन बारिश की भविष्यवाणी करता था, फिर बारिश होती थी। लेकिन आज के समय में वैज्ञानिक फेल हो गये हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासियों का मतलब है वे लोग जो अनादिकाल से यहां रहते आ रहे हैं।

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जल, जंगल और जमीन से है आदिवासियों की पहचान

मुख्य अतिथि उपायुक्त हिमांशु मोहन ने कहा कि विश्व के 195 देशों में विश्व मूलनिवासी दिवस मनाया जा रहा है। विश्व मूलनिवासी दिवस मनाने की मांग अमेरिका में उठी। उसके बाद 1995 से लगातार यह मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आदिवासियों की पहचान जल, जंगल और जमीन से है, जो उनमें नजर भी आ आता है।

आदिवासियों के लिए प्रकृति से बड़ा कोई धार्मिक ग्रंथ नहीं

लातेहार विधायक बैद्यनाथ राम ने कहा कि आदिवासियों को आदिवासी होने पर गर्व होना चाहिए। क्योंकि दुनिया के सभी मानव समुदायों में आदिवासी ही हैं, जो प्रकृति का दोहन किये बिना उसके साथ आसानी से अपना जीवन गुजारते हैं। आदिवासियों के लिए प्रकृति से बड़ा कोई धार्मिक ग्रंथ नहीं है और प्रकृति से बड़ा कोई देवी-देवता नहीं है।

दिल के सच्चे होते हैं आदिवासी

मनिका विधायक रामचन्द्र सिंह ने कहा कि आदिवासी दिल के सच्चे होते हैं, जो उनके चरित्र को और पवित्र करता है। आदिवासी समाज को अपने अधिकार के लिए एकजुट होना होगा। एकता से ही समाज का विकास हो सकता है। जल, जंगल और जमीन से जुड़े आदिवासी समाज के कई लोग आज भी अपने अधिकारों से वंचित हैं। हर किसी को अपने हक के लिए लड़ना होगा।

आदिवासी की पहचान उसकी भाषा

जिला परिषद अध्यक्ष पूनम देवी ने कहा कि आदिवासी की पहचान उसकी भाषा है और इसे किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ा जाना चाहिए। आदिवासियों को भाषा, शिक्षा और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने को कहा।

आदिवासियों के विकास के लिए चलायी जा रही हैं कई योजनायें

अपर समाहर्ता आलोक शिकारी कच्छप ने कहा कि आदिवासियों के विकास के लिए सरकार द्वारा कई योजनायें चलायी जा रही हैं। उसका लाभ उठायें।

समाज को निरोग रहना सिखाती है आदिवासियों की पारंपरिक चिकित्सा पद्धति

युवा कांग्रेस की प्रदेश उपाध्यक्ष निशा भगत ने कहा कि आदिवासी समाज के लोगों ने प्रकृति के साथ नाचना-गाना सीख लिया है। आदिवासियों का जल, जंगल और जमीन से जो लगाव है, इसका वर्णन नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि आदिवासियों की पारंपरिक चिकित्सा पद्धति समाज को निरोग रहना सिखाती है।

आदिवासियों को जागरूक होने की जरुरत

एसडीओ शेखर कुमार ने आदिवासियों को जागरूक होकर समाज में अपनी पहचान बनाने, सरकार द्वारा चलायी जा रही योजना का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।

इनकी थी उपस्थिति

कार्यक्रम का मंच संचालन सरना समिति के कोषाध्यक्ष रंथु उरांव ने किया। मौके पर लातेहार बीडीओ मेघनाथ उरांव, सुजीत सिंह, सदर अस्पताल की महिला डॉक्टर चंद्रमणि बाखला, जिला परिषद सदस्य विनोद उरांव, विधायक प्रतिनिधि प्रभात कुमार, पूर्व जिला परिषद सदस्य रघुपाल सिंह, मुखिया सुनीता देवी, संजय उरांव, अनीता देवी, रवि भगत, प्रवेश उरांव, राम दयाल भगत, साजन कुमार, सुरेंद्र उरांव, लोहरा समाज के जिला अध्यक्ष मोहन लोहरा, हरदयाल भगत, प्रखंड बीस सूत्री सदस्य रिंकू कच्छप, प्रमुख परशुराम लोहरा, परसही मुखिया अनीता देवी, जालिम मुखिया सुनीता देवी, आशा देवी, रामदेव सिंह, लालमोहन सिंह, विशाल कुमार, बादल कुमार, चंदन कुमार समेत आदिवासी सामुदाय के लोग मौजूद थे।

शहर में निकाली गयी विशाल रैली

कार्यक्रम से पहले आदिवासी समन्वय समिति की ओर से स्थानीय बाजारटांड़ से मेन रोड होते हुए वोसाओड़ा तक विरोध रैली निकाली गयी। इस दौरान आदिवासियों का शोषण बंद करो, आदिवासियों पर फर्जी मुकदमा बंद करो, आदिवासी महिलाओं पर अत्याचार बंद करो समेत कई नारे लगाये गये। वासोदा पहुंचने के बाद विरोध प्रदर्शन रैली में तब्दील हो गया। रैली में उराँव, खेरवार, लोहरा आदि समुदाय के लोग शामिल हुए।

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