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मनिका के 16 परहिया आदिम जनजाति समुदाय के लोगों को मिला वन भूमि का पट्टा

लातेहार : वन अधिकार अधिनियम 2008 के नियम 8 (J) के तहत मनिका प्रखंड के उच्चवाल (लंका) के 16 परहिया आदिम जनजाति समुदाय के लोगों को व्यक्तिगत वन भूमि का पट्टा दिया गया। जिला प्रशासन ने शुक्रवार को पट्टों का वितरण किया।

ग्राम प्रधान महावीर परहिया के नेतृत्व में करीब डेढ़ दशक से पट्टा पाने की लड़ाई लड़ी जा रही थी। 2005 से पहले बसे परिवारों को भी इस दौरान कई तरह से प्रताड़ित किया गया। उन पर जंगल को नष्ट करने का आरोप लगाया गया था। वनकर्मियों से मुकदमा चलाने की धमकियां मिलीं, लेकिन बहुत कम पढ़े-लिखे समुदाय के लोगों को अपने संविधान, अपने कानून पर पूरा भरोसा था। वह चट्टान की तरह अपने संघर्ष पर डटा रहा। आज सभी पट्टाधारक परिवार गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं, लेकिन थोड़ा निराश भी हैं।

हालांकि, विभागीय अधिकारियों ने वास्तविक दावा क्षेत्र में व्यापक कटौती की है, जो बड़े खेद का विषय है। जबकि सभी 16 दावेदारों ने कुल 56.33 एकड़ जमीन का दावा किया था, वहीं सिर्फ 7.03 एकड़ यानी सिर्फ 4 फीसदी क्षेत्र ही सभी लोगों को एक साथ बांटा गया है।

इसका जवाब देते हुए नेता महावीर परहिया ने कहा कि जिला प्रशासन ने हमारे साथ अन्याय किया है। हमारे दावों को बिना किसी कानूनी प्रावधान के काट दिया गया है। हम इस रकबे में कटौती की तरह अन्याय के खिलाफ अपना संघर्ष जारी रखेंगे। हम अपनी जमीन को किसी भी कीमत पर नहीं छोडेंगे।


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