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Friday, April 12, 2024
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भाकपा माओवादी के दस लाख के इनामी जोनल कमांडर समेत पांच नक्सलियों ने अत्याधुनिक हथियार के साथ किया आत्मसमर्पण

रांची : प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा-माओवादी के कौलेश्वरी जोन के सब जोनल कमांडर अमरजीत समेत पांच नक्सलियों ने सोमवार को झारखंड पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया।

रांची आईजी जोनल ऑफिस में आयोजित कार्यक्रम के दौरान नक्सलियों ने आईजी अभियान एवी होमकर, डीआईजी हजारीबाग नरेंद्र सिंह, चतरा एसपी राकेश रंजन व सीआरपीएफ के आईजी विधि कुमार विधि के समक्ष सरेंडर किया। सरेंडर करने वाले नक्सलियों में 10 लाख के इनामी जोनल कमांडर अमरजीत यादव उर्फ टिंगू, पांच लाख का इनामी सब जोनल कमांडर सहदेव यादव उर्फ लटन, सब जोनल कमांडर नीरू यादव उर्फ सलीम, सब जोनल कमांडर संतोष भुइया उर्फ सुकन और दस्ते का सदस्य अशोक बैगा उर्फ अशोक परहिया शामिल हैं।

हथियारों के साथ किया सरेंडर

नक्सलियों ने सरेंडर करते वक्त हथियार, कारतूस और वायरलेस भी पुलिस को सौंप दिया। इनमें दो एके 56, एक एसएलआर, एक इंसास राइफल, चार मार्क 2 राइफल, एक यूएस राइफल, एक एयरगन, दो देशी बंदूकें, एक पिस्टल, 1855 जिंदा कारतूस, विभिन्न हथियारों की 41 मैगजीन, 16 वायरलेस सेट, आईईडी बनाने के उपकरण इसमें पाउडर, पोटाश, मैनसिल 25 किलो शामिल हैं।

पांचों नक्सलियों के खिलाफ कुल 223 मामले दर्ज

आईजी अभियान सह पुलिस प्रवक्ता एवी होमकर ने सोमवार को बताया कि अमरजीत यादव पर चतरा में 41, बिहार के गया में 40, कुल 81 मामले दर्ज हैं। सहदेव यादव के खिलाफ चतरा में 26, हजारीबाग में एक, बिहार के औरंगाबाद में 10, बिहार के गया में 16 मामले दर्ज हैं। इसके अलावा नीरू यादव के खिलाफ चतरा में 27, हजारीबाग में एक, बिहार के गया में 19 और बिहार के औरंगाबाद में 13 मामले दर्ज हैं। इसी तरह संतोष भुइयां के खिलाफ चतरा में 19, बिहार के गया में पांच और औरंगाबाद में तीन, कुल 27 और चतरा में अशोक बैगा के खिलाफ दो मामले दर्ज हैं।

आईजी ने बताया कि झारखंड सरकार ने राज्य को नक्सल मुक्त राज्य बनाने का संकल्प लिया है। इसी संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है और इस दिशा में पुलिस को नक्सली संगठनों के खिलाफ सफलता भी मिल रही है। साथ ही भटके नक्सलियों को मुख्य धारा में लौटने के लिए राज्य सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति नई दिशा का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।

आईजी ने कहा कि सरकार ने झारखंड को नक्सल मुक्त राज्य बनाने का संकल्प लिया है। इस संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है और इस दिशा में पुलिस को नक्सली संगठनों के खिलाफ सफलता भी मिल रही है। साथ ही भटके हुए नक्सलियों को मुख्यधारा में वापस लाने के लिए राज्य सरकार की समर्पण एवं पुनर्वास नीति नई दिशा का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।

गौरतलब है कि एक मई को भाकपा माओवादी के रीजनल कमांडर व 15 लाख के इनामी इंदल गंझू उर्फ ललन गंझू ने सरेंडर किया था।

जमीन विवाद में उठाये हथियार

प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादी के कौलेश्वरी जोन के सब-जोनल कमांडर दस लाख के इनामी अमरजीत यादव जमीन विवाद को लेकर नक्सली बना था। उसके रिश्तेदार (गोतिया) ने उसकी जमीन हड़पने की फिराक में थे।

नक्सली ने सोमवार को सरेंडर करने के बाद बातचीत में कहा कि भाकपा माओवादी संगठन के कमांडर प्रताप दास के जरिये वह संगठन में 2006 में शामिल हुआ। संगठन में शामिल होते ही रिश्तेदारों ने उसकी जमीन वापस लौटा दी। बिहार के गया जिले के बाराचट्टी के रहने वाले अमरजीत यादव के संगठन में सक्रिय रूप से काम करने और ग्रामीणों को संगठन में जोड़ने से संगठन मजबूत हो गया। इसके कार्य को देखते हुए 2006 में ही उसे एरिया कमांडर की जिम्मेवारी दी गयी। वर्ष 2008 में उसे सब-जोनल तथा 2021में अमरजीत को कौलेश्वरी जोन का जोनल कमांडर और सचिव बनाया गया।

रिश्तेदार हड़पना चाहते थे जमीन

इसी तरह सरेंडर करने वाला सब-जोनल कमांडर सहदेव यादव चतरा के राजपुर का रहने वाला है। वह भी जमीन विवाद को लेकर संगठन में शामिल हुआ। संगठन में शामिल होते ही उसके रिश्तेदार उसका जमीन वापस लौटा दिये। सहदेव भी वर्ष 2006 में ही संगठन से जुड़ा था। सरेंडर करने वाला सब-जोनल कमांडर नीरु यादव बिहार के गया जिले के बाराचट्टी का रहने वाला था। वह भी जमीन विवाद की वजह से वर्ष 2004 में संगठन में शामिल हुआ।

रीजनल कमेटी सदस्य के बहकावे में आकर उठाया हथियार

सरेंडर करने वाला पांचवें नक्सली दस्ता सदस्य अशोक बैगा चतरा जिले के कुंदा थाना क्षेत्र का रहने वाला है। वह भी जमीन विवाद को लेकर 2023 में भाकपा माओवादी संगठन से जुडा। सरेंडर करने वाले सब-जोनल कमांडर संतोष भुईंया चतरा जिले के प्रतापपुर का रहने वाला है। वह भाकपा माओवादी के रीजनल कमेटी सदस्य इंदल गंझू के बहकावे में आकर संगठन से 2017 में शामिल हुआ।