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Saturday, February 24, 2024
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जानलेवा बना ‘खौफ’ आदिवासी अधिकारी का आकस्मिक निधन!

BDO Pratao Toppo passes away

लातेहार : जिले के गारू प्रखंड में पदस्थापित बीडीओ प्रताप टोप्पो की शनिवार की रात मौत हो गयी। उनके निधन से प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा आम लोगों में भी शोक की लहर है। मेडिकल भाषा में कहें तो प्रताप टोप्पो की मौत कैंसर की गंभीर बीमारी के कारण हुई। लेकिन अंदरखाने में यह चर्चा आम है कि एक अधिकारी के खौफ से प्रताप टोप्पो इस स्थिति में पहुंचे। आदिवासी राज्य झारखंड में तनाव के कारण रूपा तिर्की और उमेश कच्छप की मौत का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि प्रताप टोप्पो की मौत के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

सूत्रों की माने तो लगभग 9 माह पहले प्रताप टोप्पो बीमार हो गये थे। वे इलाज के लिए छुट्टी लेना चाह रहे थे। छुट्टी के आवेदन के साथ वे लातेहार कलेक्ट्रेट भी गये थे। लेकिन छुट्टी मांगने पर एक अधिकारी ने भरी मीटिंग उनके साथ अत्यंत बुरा बर्ताव किया था। जिसके कारण वह खौफ के साथ साथ तनाव में आ गये थे। तनाव के कारण घर में ही गिर गये थे, जिससे उनके सिर में चोट भी आयी थी। इसके बाद स्थानीय स्तर पर ही अपना इलाज कराया और काम करते रहे। दवा लेने के कारण बीमारी का प्रभाव स्पष्ट दिखायी नहीं दे रहा था। लेकिन नवंबर माह के शुरुआत में जब उन्हें ज्यादा परेशानी होने लगी तो छुट्टी लेकर उन्होंने अपना इलाज आरंभ करवाया। लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। शनिवार की रात उन्होंने अंतिम सांस ली।

इधर, घटना की जानकारी मिलने के बाद झारखंड प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों में भी भारी आक्रोश है। झारखंड प्रशासनिक अधिकारियों का आक्रोश कभी भी आंदोलन का रूप ले सकता है। विश्वस्त सूत्रों की माने तो झारखंड प्रशासनिक सेवा संघ के अधिकारियों के व्हाट्सएप ग्रुप में इस बात को लेकर जोरदार चर्चा भी शुरू हो गयी है।

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कुल मिलाकर कहा जाये तो रूपा तिर्की और उमेश कच्छप की मौत का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि खौफ और तनाव ने एक बार फिर आदिवासियों के राज्य झारखंड में एक आदिवासी अधिकारी की जान ले ली। जरुरत इस बात की है कि बड़े पदों पर स्थापित सामंती मानसिकता वाले अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर जांच गठित कर सरकार कार्रवाई करें। ताकि राज्य के विकास में योगदान देने वाले छोटे अधिकारी और कर्मचारियों को भी काम करने का एक अच्छा माहौल मिले और वे तनावमुक्त होकर राज्य के विकास में अपना संपूर्ण योगदान दे सकें।

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