लातेहार : जिलेभर में सुहागिनों ने की वट सावित्री पूजा, नहीं दिखा कोरोना का भय

लातेहार जिले में गुरुवार को सुहागिन महिलाओं ने वट सावित्री पूजा की। इस दौरान पूजा अर्चना में लीन महिलाओं में कोराना का भय देखने को नहीं मिला।

वट सावित्री पूजा को लेकर सुहागिन महिलाओं ने सोलह श्रृंगार के साथ पति की लंबी आयु और स्वास्थ्य को लेकर हाथों में पूजा की थाली ले वट वृक्ष के नीचे वैदिक मंत्रोंच्चारण के बीच विधिवत रूप से पुजा अर्चना के साथ सावित्री सत्यवान की कथा का श्रवण किया व वट वृक्ष के तने की 108 बार परिक्रमा करते हुए कच्चा सूत लपेट कर अमर सुहाग की कामना की। कहा जाता है कि वट सावित्री पूजा अटल सौभाग्य का प्रतीक है। सावित्री ने इसी के प्रभाव से अपने मृतक पति सत्यवान को धर्मराज के चंगुल से छुड़ाया था।

वटवृक्ष के नीचे मिट्टी के सावित्री और सत्यवान तथा भैंसे पर सवार यम की प्रतिमा स्थापित कर सुहागिनों ने पूजा की। वही सुहागिनों ने वटवृक्ष को पानी से सींचा। पूजा में जल, मौली, रोली, कच्चा सूत, भिगोया हुआ चना, पुष्प तथा धूप चढ़ाया। सुहागिनों ने वटवृक्ष में कच्चा सूत लपेट कर तीन बार परिक्रमा की।

आचार्य नरेंद्र कुमार मिश्रा ने बताया कि सुहागिनों को सती- सावित्री की कथा सुननी चाहिए। भीगे चना से बायना निकालकर उसमें पैसे रखकर सास अथवा उनके उम्र की सुहागिन महिलाओं को देकर उनसे आशीर्वाद लेनी चाहिए।

महुआडांड़ प्रखंड की सुहागिन महिलाओं ने की वट सावित्री पूजा

पूरे प्रखंड भर में गुरुवार को वट सावित्री व्रत पूजा किया गया। हिन्दू धर्मावलंबी महिलाओं ने व्रत रखकर सुहाग के कल्याण एवं रक्षा की कामना की। व्रत को लेकर प्रात: से महिलाएं बरगद पेड़ के नीचे दिखने लगी। वही वैदिक मंत्रोच्चार के बीच महिलाओं ने पंचोपचार विधि से वट वृक्ष का पूजन किया एवं वृक्ष में कच्चा सूत को बांधकर परिक्रमा की। महिलाओं ने कहा कि इस पर्व को लेकर आज व्रत धारण करेंगी। उन्होंने पूजन के उपरांत सदा-सुहागिन रहने की मन्नत मांगी है।

पंडित राजेश पाठक ने इस व्रत के संदर्भ में बताया कि पुरातनकाल में सती सावित्री ने इस व्रत को किया था तथा सदा-सुहागन रहने की मंगलकामना की थी। व्रत के परिणामस्वरूप उनके पति की उम्र पूरी हो जाने के बाद भी यमराज ने पुन: जीवनदान दिया था। तबसे यह व्रत पृथ्वीलोक पर प्रचलित है और सुहागिन महिलाएं इस व्रत को धारण करती रही हैं। व्रत को लेकर प्रात: चार बजे से रंग-बिरंगे परिधानों में सजी महिलाओं की भीड़ 11 बजे तक बरगद पेड़ आस पास देखी गई। प्रखंड मुख्यालय के डीपाटोली, चटकपूर, अम्वाटोली, कापू, बराही, बरदौनी समेत कई गांव मे वट वृक्ष में धागा बांधकर परिक्रमा कर महिलाओं ने अपने पति की रक्षा की कामना की। वट सावित्री व्रत के मौके पर महिलाओं ने उपवास रखकर पूजा-अर्चना की।

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