लातेहार : गरीबी उन्मूलन सरकार और समाज के लिए बड़ी चुनौती, आज भी सैकड़ो परिवार सरकारी लाभ से हैं वंजित

महुआडांड़ से युवा पत्रकार वसीम अख्तर की स्पेशल रिपोर्ट

नरेगा वांच सदस्य अफसाना ने कई परिवारों को किया चिन्हित, जिन्हें नहीं मिलता है खाद्द्यान

गरीबी उन्मूलन न केवल सरकार के लिए बल्कि समाज के लिए भी एक बड़ी चुनौती है। इसको खत्म करने के लिए सरकार क्षेत्र मे कई प्रकार के योजनाएं चला रखी है। वहीँ लातेहार जिले के प्रखंड महुआडांड़ मे कई गरीब लाचार परिवार है। जिसकी हालत वास्तव में आज तक बदहाल है। ये खाद्द्यान संकट से जूझते रहते है। कोरोना की दूसरी लहर मे भी सरकारी लाभ से वंचित है। जबकि ये गरीबी रेखा से नीचे गुजर कर रहे हैं। प्रखंड के विभिन्न पंचायत अंतर्गत गांव से आधा दर्जन ऐसे गरीब परिवारो को स्थानीय समाजिक कार्यकर्ता नरेगा वांच सदस्य अफसाना ने चिन्हित किया है।

महुआडांड़ पंचायत

महुआडांड मे रहने वाली जस्निता बृजिया ( 35 ) पति सुरेन्द्र बृजिया ( 40 ) इनके छ: बच्चे है, छोटे है। पति-पत्नि मेहनत मजदूरी करते है, तब जाकर परिवार का पेट भरता है। ये संरक्षित जन जातिय आदिवासी परिवार भूमिहीन है। परिवार के किसी सदस्य का अब तक न आधार कार्ड है, न ही पहचान पत्र है। ये मत अधिकार से भी वंचित है। जस्निता बृजिया कहती है, कि झारखंड-छत्तीसगढ सीमा के जंगल क्षेत्र से दशको पहले हमारे पूर्वज परिवारो के संग महुआडांड मजदूरी करने आये थे, और लौटकर नही गये। शुरू से किराये मे हम रहते आ रहे है, हमारे पास अपना पहचान का कोई दस्तावेज नही है। सभी तरह के सरकारी लाभ से वंचित है।

जस्निता बृजिया

महुआडांड के आवासीय विद्यालय स्थित किराये के घर मे रह रहे नवासाय बड़ाईक (35) जो भूमिहीन है, पत्नी साथ रहता है। कोई बच्चा नही है, ये दो सदस्यो का परिवार का अभी तक राशन कार्ड नही बना है। नवासाय बड़ाईक जो होटलो मे पानी भरता है,एवं बर्तन धोकर अपनी जीविका चलता है। नवासाय ने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर मे सभी होटल जब बन्द थे, तो जिविका चलाना मुश्किल हो गया है, अन्य मजदूरी का काम आसानी से नही मिलता है।

रूपनी बृजिया

रूपनी बृजिया पति स्व. रोजना वृजिया, भूमिहीन है, दो बेटा, एक बहु है, बहु के दो बच्चे, रूपनी बृजिया का एक बेटा बाहर कमाने चला गया है, परिवार मे पांच सदस्य है। वही राशन के नाम मे 10 किलो हर महिने चावल मिलता है। मजदूरी करते है, तो परिवार पलता है।

परहाटोली पंचायत

बेलटोली ग्राम के बाजू तिर्की ( 70 ) वृद्ध एवं विकलांग है, वही पत्नि का दो महिने पहले बिमारी से मौत हो गई, वह भी विकलांग थी, एक बेटा है, विनोद तिर्की (40) वह भी विकलांग है, बहु भी विकलांग है, विनोद तिर्की के चार बच्चे है, वर्तमान मे सभी स्वास्थ है, इस परिवार का आज तक राशन कार्ड नही बना है। थोड़ी भूमि है, विकलांगता के कारण ये खेती नही कर सकते तो साझेदारी मे देकर जो अनाज हिस्से मे मिलता है, उससे पूरा साल जीविका चलाता है।

बाजू तिर्की

कुरो खुर्द ग्राम के सुनिल टोप्पो वर्तमान मे पैर टूटा हुआ है। परिवार मे कुल छ: सदस्य है, इनका राशन कार्ड नही बना है। वही घर की आर्थिक स्तिथि सही नही रहने के कारण पत्नी काम करने दिल्ली चली गई है।

सुनिल टोप्पो

कित्ता ग्राम निवासी सुमिता कुजूर ( 30 ) पति रोबट किण्डो, इनकी एक पांच वर्षीय बच्ची है। ये तीन सदस्य परिवार गांव से पलायन करके कुछ वर्षो से हरियाना मे रहकर मेहनत मजदूरी कर जीवन बसर करता था। वही करोना की पहली लहर मे रोबट किण्डो अपनी पत्नि और बच्ची के साथ हरीयाना से पैदल चलकर डाल्टनगंज तक पहुंचा था। सुमिता कहती है, भूखे प्यासे पैदल आये थे। दिन रात चलते थे, डाल्टेनगंज से घर तक एक ट्रक ने पहुंचा दिया था। दूबारा बाहर नही गये। हमारा राशन कार्ड नही है, घर की आर्थिक स्तिथि बहुत खराब है।

सुमिता कुजूर

सोहर पंचायत

आराहंस गांव के रजना मुण्डा ( 80 ) वर्तमान मे मेराम गांव मे दूसरो के घर मे रहता है। राशन नही मिलता और पेंशन 2019 से बन्द हो गया। दो वर्ष पहले बेटे ने घर से निकाल दिया है। रजना मुण्डा ने कहा भगनी के घर पर रह रहा हूं, ये भी गरीब है, खाने पीने का कष्ट है। शरीर मजदूरी करने लायक नही है।

15 लाख लोगो को देना था योजना का लाभ

सामाजिक कार्यकर्ता धीरज कुमार कहते है, झारखंड सरकार खाद्य सुरक्षा योजना का लक्ष्य पूरा नही कर पाई है.15 लाख लोगो को योजना का लाभ देना था। लेकिन अबतक सिर्फ 11 लाख लोगो को जोड़ा गया है। लातेहार जिला मे 33 हजार को इस योजना से जोड़ना था। लेकिन सिर्फ 20 हजार लोगो को जोड़ा गया है।

सामाजिक कार्यकर्ता धीरज कुमार ने सरकार का कराया था ध्यानाकृष्ट

संस्था: मल्टी आर्ट एसोसिएशन डाल्टनगंज की ओर से प्रखंड मे गरीब, वृद्ध, विधवा, जरूरतमंदो को राहत सामग्री मुहैया कराया जा रहा है

अफसाना कहती है, प्रखंड के ऐसे सभी गरीब परिवार के सदस्य के आधार कार्ड एवं पासबुक की फोटो काॅपी मै ले रही हूं। जिसे महुआडांड़ प्रखंड विकास पदाधिकारी को आवेदन के साथ दिया जाएगा। सरकार और समाज का दायित्व है कि, गरीब और जरूरतमंद लोगो की मदद की जाए। प्रखंड मे ऐसे कई परिवार है,जो खाद्यान्न संकट से जूझते हैं, इनमे खास करके विधवा बुजुर्ग, भूमिहीन है। परिवार राशन कार्ड से वंचित है। प्रखंड के विभिन्न गांव मे जाकर ऐसे परिवार के बीच मल्टी आर्ट एसोसिएशन, डालटनगंज की ओर से राहत सामग्री मुहैया कराया जा रहा है, सामग्री के तौर पर 25 किलो चावल, 1 किलो दाल, 1-1 किलो चना और गुड़ तथा 3 पीस साबुन सहित मास्क दिया जा रहा है।

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