स्पेशल स्टोरी : PTR में क्या जिंदा है टाइगर ?

महुआडांड़ / वसीम अख्तर

अखिल भारतीय बाघ अनुमान में एक भी बाघ पलामू टाइगर रिजर्व मे नहीं पाया गया। वही फरवरी 2020 में पीटीआर के जंगल मे एक बाघिन मृत पाई गई थी। जो यह स्थापित करता है कि बाघ था। वन प्रक्षेत्र महुआडांड़ अंतर्गत अति सूदूर गांव हाड़ीबार के जंगल मे बीते मई माह की 26 तारीख को एक पालतू भैंसा को जंगल मे जानवर मे मार डाला। गर्दन पर दांत के दूरी का निशान एवं किल का अनुमान बताता है, भैंसा को टाईगर ने मारा है। वन विभाग महुआडांड़ इस क्षेत्र मे तथाकथित टाइगर होने के संकेत पर ट्रेकिंग कर रही है। अगर जंगल मे बाघ होने के प्रमाण मिला तो यह पलामू टाइगर रिजर्व के लिए सुखद संदेश होगा। टाइगर पीटीआर मे जिंदा है।

घटना पिछ्ले 26 मई 2021 को हाड़ीबार निवासी केश्वर प्रसाद के एक भैंसा को जंगली जानवर ने किल कर मार डाला। केश्वर प्रसाद ने इसकी खबर स्थानीय वन टेकर विश्व प्रसाद को दी। वन टेकर विश्व प्रसाद ने कहा कि जब जंगल मे जाकर देखा तो मृत भैंसा झाड़ी के पीछे चट्टान पर पड़ा था। शरीर नोचा नही गया था। गर्दन पर दांतो का निशान था। भैंसा को छोड़ वहा कैमरा लगाया गया, उसके पद चिन्ह की तलाश कि गई, पर चुकि पानी आने के कारण पद चिन्ह नही मिले। दो दिनो तक कैमरा लगा रहा कोई जानवर नही आया। केश्वर प्रसाद ने बताया पिछले साल भी इसी तरह गर्दन से खून चूसकर एक भैसा को बाघ मे ही मारा था।

महुआडांड़ रेंजर वृंदा पांडेय कहते है, टाइगर हो ये जरूरी नही पर घटनाक्रम और कील करने का नेचर, गर्दन पर दांतो की दूरी तो संकेत देता है। जांच चल रही है। आये दिन वन प्रक्षेत्र के बेलवार, उदालखाड़ गांवो आस पास तेंदुआ द्वारा लोगो के पालतू जानवर का शिकार होता रहता है। हम कैमरा लगाते है, तेंदुआ का प्रमाण मिलता है। इस बार मृत जानवर को छोड़ कैमरा लगया गया तो खाने कोई नही पहुंचा।

क्या कहते हैं वाइल्डलाइफ विशेषज्ञ

डॉ. डीएस श्रीवास्तव ( वाइल्डलाइफ विशेषज्ञ, पलामू ) कहते है, पीटीआर मे बाघ होने का प्रमाण मिले तो ये सुखद संदेश होगा। स्थानीय रेंजर क्या सच्चाई है, इसकी तफ्तीश कर रहे है। आये दिन पीटीआर मे तेंदुआ के संख्या मे वृद्धि हुई है। भैंसा के गर्दन पर जो निशान की दूरी बताई जा रही है, वह टाइगर के जबड़ा का संभावना लगता है।

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