महुआडांड़ के नेचुरल ग्रोथ से पका बीजू आम, पलामू क्षेत्र में भी है प्रसिद्ध

वसीम अख्तर / महुआडांड़

लातेहार : महुआडांड प्रखंड आदिवासी बहुत क्षेत्र है, जंगल, पहाड़ नदियों से आच्छादित महुआडांड़ को प्रकृति ने तमाम उपहारो से नवाजा है, जंगल में विभिन्न प्रकार के वनोत्पाद पाए जाते हैं, क्षेत्र के ग्रामीण जंगल के वनोत्पाद का भरपूर लाभ उठाते है, प्रखंड की आबादी 74,732 है। महुआडांड़ चारो ओर पहाड़ से घिरा है, झारखंड-छत्तीसगढ सीमा से सटा ये झारखंड का एक प्रखंड है, यहां अनेको मनोरम पर्यटन स्थल हैं। नेतरहाट लोध फॉल, सुग्गा बांध समेत अन्य स्थल हैं।

बीजू आम

यह मांजी के खासियत है कि हमारे पूर्वजो ने छेछारी घाटी की कुछ विषेशता को आज तक संजोकर रखा है। बात उन खूबसूरत पीले बीजू आमों की हो रही है, जो प्रखंड की विशेषता है। ये आम अवाम का फल है। प्रखंड के मैदान एवं जंगल क्षेत्र मे घूमने वाले नौजवान, महिला, पुरूष का आम पेड़ से इन दिनो एक खास रिश्ता होता है। बीजू आम अपनी विशेषता लिए पलामू क्षेत्र मे प्रसिद्ध है। खटे-मीठे, मिठास, सुगंध लिए बीजू आम का कोई सानी नहीं है। इसके कच्चे आम का अचार और चटनी का भी कोई विकल्प नहीं है।

पका बीजू आम गरीब आदिवासी परिवारो की आर्थिक सहायता के लिए अब तैयार है। कोरोना की दूसरी लहर ने प्रखंड के ग्रामीणो को दोहरी मार दी है। ताउते, यास जैसे साइक्लोन के प्रभाव से मुशलाधार बारिश होने के कारण प्रखंड मे सब्जी की खेती को भारी नुकसान पहुंचा है। तो बीजू आम के लिए ये बारिश वरदान साबित हुआ है। पका हुआ आम प्रखंड के बाजार मे 10 रू किलो बेचा जा रहा है। महुआडांड़ मे बीजू आम की असंख्य प्रजातियां पाई जाती है, इनके मैदान और जंगल क्षेत्र मे अनगिनत पेड़ है। बीजू आम को चूसकर खाया जाता है। जो नेचुरल ग्रोथ से पके होते है।

व्यापारी

सरफू अंसारी कहते है, चालीस साल से आम, कटहल की खरीदारी करता रहा हूं। आम की खरीदारी होने लगी है, अभी थोड़े बहुत निकल रहे है, पिछले साल एक भी आम नही था। इस वर्ष अच्छी उपज है। पलामू क्षेत्र मे यहां के बीजू आम को खूब पसंद किया जाता है, यहा से आम की खरीदारी होकर डाल्टेनगंज जाता है।

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